फ़ोन की बैटरी जल्दी ख़त्म होती है? ये 7 ऐप सेटिंग्स बदलें

अगर आपके फोन की बैटरी शाम होते-होते खत्म हो जाती है, तो यह आर्टिकल आपको कुछ आसान सेटिंग्स बदलने का तरीका बताएगा। इन छोटे बदलावों से बिना कोई नया ऐप डाले बैटरी लाइफ बेहतर हो सकती है।

फ़ोन की बैटरी जल्दी ख़त्म होती है? ये 7 ऐप सेटिंग्स बदलें

सुबह 9 बजे घर से निकलते वक़्त फ़ोन 100% दिखा रहा था। ऑफ़िस पहुँचते-पहुँचते, दो गाने सुनने और थोड़ा Instagram स्क्रॉल करने के बाद बैटरी 78% पर आ गई। दोपहर तक चार्जर ढूँढने की जुगाड़ शुरू हो जाती है। ये कहानी सिर्फ़ आपकी नहीं है, हर दूसरे Android फ़ोन यूज़र की है।

असली प्रॉब्लम अक्सर बैटरी नहीं होती, बल्कि कुछ ऐप्स की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स होती हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप बैटरी चूसती रहती हैं। अच्छी बात ये है कि इनमें से ज़्यादातर सेटिंग्स को आप खुद बदल सकते हैं। नीचे 7 सेटिंग्स बदलकर देखिए, फ़र्क खुद महसूस होगा। आख़िर में दो बोनस आदतें भी हैं, जो ऐप सेटिंग्स से बाहर की हैं पर बैटरी पर उतना ही असर डालती हैं। फोन के ब्रैंड के हिसाब से मेनू के नाम थोड़े अलग हो सकते हैं।

1. बैटरी एडेप्टिव सेटिंग को सही तरीके से चालू करें

Android फ़ोन में Adaptive Battery या Adaptive Power जैसा ऑप्शन मिलता है। ये फ़ीचर सीखता है कि आप कौन से ऐप कब खोलते हैं और जिन ऐप्स का इस्तेमाल आप शायद ही करते हैं, उनकी बैकग्राउंड एक्टिविटी को सीमित कर देता है। ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि ये डिफ़ॉल्ट रूप से ऑन रहता है, लेकिन कई बार पुराने फ़ोन में ये बंद मिलता है या किसी अपडेट के बाद अपने आप रीसेट हो जाता है।

इसे चेक करने का तरीका आसान है। सेटिंग्स में जाकर Battery या Battery and device care खोलें। वहाँ Battery optimization या Adaptive preferences जैसा मेनू दिखेगा। Adaptive Battery का टॉगल ऑन करें। अगर फ़ोन में “Optimized” और “Unrestricted” जैसे ऑप्शन दिखें, तो ज़रूरी ऐप्स जैसे WhatsApp या Truecaller को Unrestricted छोड़ें, बाकी को Optimized पर रखें।

आम ग़लती

कुछ लोग हर ऐप को Unrestricted कर देते हैं ताकि नोटिफ़िकेशन लेट न आए। इससे बैटरी पर सीधा असर पड़ता है। सिर्फ़ उन्हीं ऐप्स को छूट दें जिनका नोटिफ़िकेशन तुरंत चाहिए, जैसे मैसेजिंग या बैंकिंग ऐप।

2. बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स की लिस्ट साफ़ करें

फ़ोन की बैटरी सबसे ज़्यादा तब खर्च होती है जब कोई ऐप स्क्रीन बंद होने के बाद भी काम करता रहता है। कुछ शॉपिंग ऐप्स, न्यूज़ ऐप्स और सोशल मीडिया ऐप्स लगातार डेटा सिंक करते रहते हैं। इन्हें रोकने के लिए बैटरी सेटिंग्स में Background usage limits या App power management जैसा सेक्शन खोलें।

वहाँ आपको उन ऐप्स की लिस्ट दिखेगी जो सबसे ज़्यादा बैटरी खा रहे हैं। जिन ऐप्स की ज़रूरत नहीं है, उन्हें “Restricted” या “Deep sleeping apps” की लिस्ट में डाल दें। Samsung फ़ोन में ये ऑप्शन “Sleeping apps” और “Deep sleeping apps” के नाम से मिलता है। दूसरे Android फ़ोन में भी कुछ इसी तरह का नाम होता है।

किन ऐप्स को रोकें

  • शॉपिंग ऐप्स जो आप महीने में एक बार खोलते हैं
  • फूड डिलीवरी ऐप्स जिनका इस्तेमाल वीकेंड पर ही होता है
  • गेम्स जो रोज़ाना नहीं खेले जाते
  • न्यूज़ ऐप्स जिनके नोटिफ़िकेशन आप पढ़ते भी नहीं

इन ऐप्स को स्लीपिंग लिस्ट में डालने से नोटिफ़िकेशन थोड़े लेट आ सकते हैं, लेकिन बैटरी का फ़ायदा साफ़ दिखता है। जो ऐप रोज़ाना काम का है, उसे इस लिस्ट से दूर रखें।

3. लोकेशन सेटिंग को हर ऐप के लिए अलग-अलग कंट्रोल करें

लोकेशन ट्रैकिंग बैटरी खाने वाली बड़ी चीज़ों में गिनी जाती है। कई ऐप्स को लोकेशन की ज़रूरत सिर्फ़ तब होती है जब आप उन्हें खोलते हैं, लेकिन वे हमेशा बैकग्राउंड में भी लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं। मौसम ऐप, न्यूज़ ऐप और कुछ शॉपिंग ऐप्स इसके बड़े उदाहरण हैं।

सेटिंग्स में Location खोलें और App permissions या App location access पर जाएँ। हर ऐप के सामने तीन ऑप्शन मिलेंगे। “Allow all the time” को बदलकर “Allow only while using the app” कर दें। जिन ऐप्स को लोकेशन की ज़रूरत ही नहीं है, उन्हें “Don’t allow” पर रखें।

किसे Allow all the time रखें

सिर्फ़ उन्हीं ऐप्स को हमेशा लोकेशन दें जिन्हें बिना खोले भी आपकी जगह जाननी पड़ती है, जैसे फैमिली लोकेशन शेयरिंग या फ़ोन ढूंढने वाले ऐप। बाकी सबको “while using” पर रखना सबसे सही रहता है।

जिन ऐप्स को सटीक जगह की ज़रूरत नहीं, उनके लिए “Precise location” की जगह “Approximate” चुन सकते हैं। मौसम या न्यूज़ ऐप के लिए अंदाज़न लोकेशन काफ़ी होती है। नेविगेशन के लिए Google Maps को Precise ही रहने दें।

4. स्क्रीन की Refresh Rate और Brightness को काबू में रखें

नए फ़ोन 90Hz या 120Hz refresh rate के साथ आते हैं। स्क्रॉलिंग बहुत स्मूद लगती है, लेकिन ये बैटरी पर भारी पड़ती है। अगर आपका फ़ोन सुबह से शाम तक मुश्किल से चलता है, तो refresh rate को 60Hz पर ले आएँ। फ़र्क बैटरी में साफ़ दिखेगा।

सेटिंग्स में Display खोलें और Screen refresh rate या Motion smoothness ढूँढें। वहाँ High और Standard जैसे ऑप्शन मिलेंगे। Standard चुनें। जिन्हें 120Hz की आदत हो चुकी है, उन्हें शुरू में थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन दो-तीन दिन में आँखें एडजस्ट कर लेती हैं।

ऑटो ब्राइटनेस को मौका दें

स्क्रीन की ब्राइटनेस अगर हर वक़्त 80% से ऊपर रहती है, तो बैटरी तेज़ी से गिरती है। Auto brightness ऑन रखें ताकि फ़ोन रोशनी के हिसाब से स्क्रीन एडजस्ट करता रहे। साथ ही Screen timeout को 30 सेकंड या 1 मिनट पर रखें। स्क्रीन जितनी देर जागती है, उतनी ही बैटरी जलाती है।

Dark mode भी मदद करता है, खासकर अगर आपके फ़ोन में AMOLED डिस्प्ले है। AMOLED स्क्रीन पर काले पिक्सल बंद रहते हैं, जिससे बिजली की खपत घटती है। Dark mode को पूरे दिन चालू रखना एक अच्छा विकल्प है।

5. नोटिफ़िकेशन की भीड़ कम करें

हर नोटिफ़िकेशन का मतलब होता है स्क्रीन का जागना, वाइब्रेशन मोटर का चलना और कई बार साउंड बजना। दिन में अगर फ़ोन की स्क्रीन बार-बार जागती है, तो बैटरी का एक हिस्सा बिना किसी काम के खर्च हो जाता है। शॉपिंग ऐप्स, गेम्स और न्यूज़ ऐप्स सबसे ज़्यादा नोटिफ़िकेशन भेजते हैं।

सेटिंग्स में Notifications खोलें और App notifications पर जाएँ। वहाँ हर ऐप के सामने टॉगल दिखेगा। जिन ऐप्स के नोटिफ़िकेशन आपके काम के नहीं हैं, उन्हें बंद कर दें। पूरा ऐप बंद करने की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ promotional notifications बंद करें। ज़्यादातर शॉपिंग ऐप्स में “Offers and updates” जैसी कैटेगरी होती है जिसे अलग से बंद किया जा सकता है।

Do Not Disturb का सही इस्तेमाल

रात को सोते वक़्त Do Not Disturb शेड्यूल करें। इससे सुबह तक फ़ोन की स्क्रीन बार-बार नहीं जागेगी। कुछ फ़ोन में Bedtime mode भी होता है जो स्क्रीन को ग्रेस्केल कर देता है और नोटिफ़िकेशन रोक देता है। ये आदत बैटरी और नींद दोनों के लिए अच्छी है।

एक और सेटिंग है “Wake screen for notifications”। इसे बंद कर दें ताकि नोटिफ़िकेशन आने पर स्क्रीन जागे नहीं, सिर्फ़ लाइट या साउंड से पता चले। Always On Display अगर चालू है, तो उसे भी बंद करने पर विचार करें। ये सुविधा सुविधाजनक है, लेकिन लगातार बैटरी खाती है।

6. ऑटो-सिंक और बैकअप सेटिंग्स को समझदारी से चुनें

Google अकाउंट, फोटो बैकअप और कई ऐप्स का ऑटो-सिंक बैकग्राउंड में चलता रहता है। Google Photos जैसे ऐप्स अगर हर फोटो और वीडियो को तुरंत बैकअप करते हैं, तो डेटा और बैटरी दोनों खर्च होते हैं। खासकर तब, जब आपने दिन में कई फोटो खींचे हों।

Google Photos में Backup settings खोलें। वहाँ mobile data से बैकअप वाला विकल्प बंद कर दें, ताकि बैकअप सिर्फ़ Wi-Fi पर हो। फ़ोन के हिसाब से “only while charging” जैसा विकल्प भी मिल सकता है, जिसमें फ़ोन चार्जिंग में लगेगा तभी फोटो बैकअप होंगी।

Google अकाउंट सिंक चेक करें

सेटिंग्स में Accounts या Passwords and accounts खोलें। अपने Google अकाउंट पर टैप करें और Sync account खोलें। वहाँ कई चीज़ें सिंक होती दिखेंगी जैसे Calendar, Contacts, Drive, Gmail। जिनकी ज़रूरत नहीं है, उनका सिंक बंद कर दें। Contacts और Calendar जैसी ज़रूरी चीज़ें चालू रखें, बाकी बंद की जा सकती हैं।

ये छोटा कदम उठाने से फ़ोन को बार-बार Google सर्वर से बात करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। बैटरी की बचत के साथ मोबाइल डेटा भी कम लगता है।

7. Wi-Fi, Bluetooth और Nearby Scanning बंद करें

फ़ोन में एक चीज़ होती है जिसे ज़्यादातर लोग जानते नहीं। Wi-Fi बंद करने के बाद भी फ़ोन आस-पास के नेटवर्क खोजता रहता है। इसे Wi-Fi scanning और Bluetooth scanning कहते हैं। ये फ़ीचर लोकेशन को बेहतर बनाने के लिए होते हैं, लेकिन थोड़ी बैटरी भी खाते हैं।

सेटिंग्स में Location खोलें और नीचे Wi-Fi and Bluetooth scanning या Location services पर जाएँ। दोनों स्कैनिंग ऑप्शन बंद कर दें। बाहर खुले में लोकेशन पर ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता, क्योंकि GPS काम करता रहता है। हाँ, इमारत के अंदर लोकेशन थोड़ी कम सटीक आ सकती है।

ज़रूरत न हो तो बंद रखें

Wi-Fi और Bluetooth को हमेशा चालू छोड़ना आदत बन जाती है। लेकिन घर से बाहर निकलते वक़्त अगर Wi-Fi चालू है, तो फ़ोन बार-बार नए नेटवर्क खोजता है। यही हाल Bluetooth का है। ये खोज दिन में कई बार होती है और हर बार थोड़ी बैटरी लगती है।

जब घर पर हों, तो Wi-Fi चालू रखें। बाहर जाते वक़्त बंद कर दें। Bluetooth सिर्फ़ तब चालू करें जब ईयरबड्स, स्मार्टवॉच या कार सिस्टम से कनेक्ट करना हो। कुछ फ़ोन में Quick Settings में ही इनके टॉगल मिलते हैं, इसलिए ये आदत डालना मुश्किल नहीं है।

बोनस 1: हेवी ऐप्स के हल्के विकल्प आज़माएँ

कुछ ऐप्स अपने आप में ही बहुत भारी होते हैं। जहाँ उनका Lite वर्ज़न मौजूद हो, वहाँ उसे इस्तेमाल करने से बैटरी और स्टोरेज दोनों बच सकती है। ऐसे वर्ज़न आम तौर पर कम डेटा खाते हैं, कम रैम लेते हैं और बैकग्राउंड में कम सक्रिय रहते हैं।

एक सावधानी भी है। कंपनियाँ अपने Lite ऐप्स बंद करती रहती हैं (Messenger Lite इसका उदाहरण है), इसलिए Play Store में ऐप का नाम और “Lite” साथ में खोजकर देखें कि वह अब भी मिलता है और अपडेट होता है। जिन सेवाओं का Lite ऐप नहीं है, उनकी वेबसाइट को ब्राउज़र में खोलना भी हल्का विकल्प हो सकता है। इनका इंटरफ़ेस थोड़ा सादा होता है, लेकिन मुख्य काम पूरे हो जाते हैं।

किन ऐप्स को बदलें

  • सोशल मीडिया के Lite वर्ज़न (जहाँ उपलब्ध हों), अगर आप सिर्फ़ फ़ीड देखते हैं और मैसेज करते हैं
  • ब्राउज़र की जगह हल्का ब्राउज़र, अगर आप सिर्फ़ सर्च और पढ़ने के लिए इस्तेमाल करते हैं
  • ऐसे गेम्स जिनके हल्के वर्ज़न हैं, अगर पुराने फोन पर गेम चलाना चाहते हैं

बदलाव करने से पहले अपने ज़रूरी डेटा का बैकअप ज़रूर लें, ख़ासकर गेम की प्रोग्रेस का। लॉगिन करने पर आपका अकाउंट वही रहता है, पर हर गेम की प्रोग्रेस दोनों वर्ज़न में साझा नहीं होती।

बोनस 2: चार्जिंग की आदतें सुधारें

बैटरी बचाने की बात करें और चार्जिंग की आदतों पर ध्यान न दें, तो बात अधूरी रहती है। हर बैटरी की क्षमता समय के साथ घटती ही है, पर गर्मी और हमेशा 100% तक चार्ज रखने की आदत इसे तेज़ कर देती है। आजकल के फ़ोन फुल होने पर चार्जिंग रोक देते हैं, फिर भी रात भर लगा छोड़ना बैटरी के लिए आदर्श नहीं है।

कोशिश करें कि बैटरी बहुत नीचे जाने से पहले चार्जिंग लगा दें और 80-90% के आस-पास निकाल लें। हमेशा 0% तक उतारना और हमेशा 100% पर रखना, दोनों बैटरी के लिए अच्छे नहीं हैं। अगर रात में चार्ज करना ही पड़े, तो फ़ोन की Adaptive charging या Optimized charging सेटिंग चालू करें (जहाँ उपलब्ध हो)। ये सीखती है कि आप सुबह कब उठते हैं और 80% के बाद चार्जिंग को धीमा कर देती है।

चार्जर का चुनाव

हमेशा फ़ोन के साथ आया चार्जर या किसी भरोसेमंद ब्रैंड का चार्जर इस्तेमाल करें। सस्ते और बिना ब्रैंड वाले चार्जर बैटरी को गर्म कर सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुँचा सकते हैं। फ़ोन को चार्ज करते वक़्त मोटे कवर हटा दें ताकि गर्मी बाहर निकल सके। गर्मी बैटरी की सबसे बड़ी दुश्मन है।

फ़ोन को धूप में या गाड़ी के डैशबोर्ड पर छोड़ने से बचें। तेज़ गर्मी में बैटरी जल्दी खराब होती है और चार्ज भी जल्दी गिरता है। ये छोटी सावधानियाँ बैटरी की उम्र बढ़ाती हैं।

अपने फ़ोन के लिए एक त्वरित चेकलिस्ट

ऊपर दी गई सारी बातें करने के बाद एक बार ये छोटी चेकलिस्ट देख लें। हर बिंदु पर टिक करें और देखें कि क्या छूट तो नहीं गया।

  • Adaptive Battery चालू है और ज़रूरी ऐप्स ही Unrestricted हैं
  • बैकग्राउंड में चलने वाले बेकार ऐप्स Sleeping apps में डाल दिए गए हैं
  • हर ऐप की लोकेशन परमिशन “Allow only while using” पर है
  • स्क्रीन refresh rate Standard पर है और Auto brightness चालू है
  • शॉपिंग और गेम्स ऐप्स के नोटिफ़िकेशन बंद हैं
  • Google Photos का बैकअप सिर्फ़ Wi-Fi और चार्जिंग पर होता है
  • Wi-Fi और Bluetooth scanning दोनों बंद हैं
  • हेवी ऐप्स की जगह Lite वर्ज़न इस्तेमाल हो रहे हैं
  • चार्जिंग 20% से 80-90% के बीच रखने की कोशिश हो रही है
  • फ़ोन गर्म जगहों से दूर रहता है

ये सारी सेटिंग्स एक बार करने में दस-पंद्रह मिनट लगते हैं। इसके बाद रोज़ कुछ नहीं करना पड़ता। फ़र्क फ़ोन और ऐप्स के हिसाब से कम-ज़्यादा होगा, पर आम तौर पर एक-दो दिन में दिखने लगता है। अगर फिर भी बैटरी बहुत तेज़ी से गिरे, तो फ़ोन की बैटरी हेल्थ चेक करवाएँ या पुरानी बैटरी बदलवाने का विकल्प देखें। लेकिन पहले ये सेटिंग्स बदलकर देखें, क्योंकि ज़्यादातर मामलों में यही काफी होता है।