नया फोन हाथ में आया तो खुशी तो बहुत होती है, पर डिब्बा खोलने और शुरुआती सेटअप के बाद Play Store खोलते ही सवाल उठता है कि पहले कौन-से ऐप्स डालूँ। कुछ ऐप्स तो फोन के साथ पहले से आते हैं और काम के नहीं होते, जबकि जो ज़रूरी होते हैं वे छूट जाते हैं।
यह सूची उन ऐप्स की है जो रोज़ की ज़िंदगी आसान बनाते हैं, बिना फोन को फालतू चीज़ों से भरे। इसे Android को ध्यान में रखकर लिखा गया है, पर iPhone वाले भी इनमें से कई बातें अपना सकते हैं। ऐप्स के नाम और सुविधाएँ समय के साथ बदलती रहती हैं, इसलिए install करने से पहले Play Store का पेज देख लें।
1. एक अच्छा ब्राउज़र जो विज्ञापन और डेटा पर लगाम लगाए
हर फोन में Chrome पहले से होता है, और यह ठीक है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि पेज जल्दी खुलें और विज्ञापन कम परेशान करें, तो एक दूसरा ब्राउज़र रखना समझदारी है। Brave और Firefox दोनों जाने-माने नाम हैं और Android पर अच्छा चलते हैं। Brave में विज्ञापन रोकने वाला फीचर पहले से होता है, जिससे पेज जल्दी लोड होते हैं। अगर आप लैपटॉप पर भी Firefox इस्तेमाल करते हैं, तो उसका sync वाला विकल्प काम का है।
सबसे आम गलती यह है कि लोग फोन में जो ब्राउज़र आया है, उसी को डिफ़ॉल्ट रखे रहते हैं और फिर पॉप-अप की शिकायत करते हैं। नया ब्राउज़र install करने से काम नहीं बनता, Settings में जाकर उसे डिफ़ॉल्ट भी बनाना पड़ता है।
क्या करें
- अपनी पसंद का ब्राउज़र install करें और उसे डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र बना दें।
- पुराने bookmarks import करना न भूलें।
- Privacy settings में जाकर third-party cookies को रोक दें।
एक और बात, पासवर्ड ब्राउज़र में सेव करने के बजाय नीचे बताए गए पासवर्ड मैनेजर में रखना ज़्यादा सुविधाजनक रहता है, खासकर जब आप कई डिवाइस इस्तेमाल करते हों।
2. पासवर्ड मैनेजर, ताकि हर जगह एक ही पासवर्ड न चले
आज हर ऐप और वेबसाइट का अलग पासवर्ड रखना पड़ता है, और सब कुछ दिमाग में याद रखना मुमकिन नहीं। इसके लिए Bitwarden एक मज़बूत विकल्प है, जो मुफ्त वर्शन में भी काफी कुछ देता है और Android पर autofill ठीक से चलता है। Google का Password Manager भी फोन में मौजूद है, पर अगर आप कभी दूसरी कंपनी के डिवाइस पर जाएँ, तो Bitwarden जैसा हर जगह चलने वाला मैनेजर आसान रहता है।
लोग अक्सर हर जगह एक ही पासवर्ड रख लेते हैं, जैसे अपना नाम और कोई संख्या। यह सबसे खतरनाक आदत है। एक जगह का पासवर्ड लीक हुआ तो बाकी खाते भी खतरे में आ जाते हैं। पासवर्ड मैनेजर हर साइट के लिए अलग और मज़बूत पासवर्ड बना देता है।
सेटअप के तरीके
- Bitwarden install करके खाता बनाएँ।
- Master password लंबा रखें, पर ऐसा जो आपको याद रहे, जैसे कोई पूरी पंक्ति।
- फोन की Settings में Autofill service में Bitwarden को चुनें।
- पुराने ज़रूरी खातों के पासवर्ड धीरे-धीरे बदलते जाएँ।
Master password भूल गए तो बहुत दिक्कत होगी, इसलिए उसे डायरी में लिखकर घर में सुरक्षित जगह रखें। फोन में उसका स्क्रीनशॉट लेकर रखना गलत है।
3. क्लाउड स्टोरेज और बैकअप
फोटो, दस्तावेज़ और ज़रूरी फाइलों का बैकअप ज़रूर रखें। Google Drive Android में आसानी से बैठ जाता है और Google खाते के साथ 15 GB तक की जगह मुफ्त मिलती है, जो Gmail और Photos के साथ साझा होती है। अगर आपके पास पहले से Google खाता है, तो यह तुरंत चालू हो जाता है।
iPhone वालों के लिए iCloud है, पर अगर आप Android फोन और iPad जैसे दो तरह के डिवाइस इस्तेमाल करते हैं, तो Google Drive बीच का अच्छा पुल बनता है। फाइलें साझा करना और फोल्डर सजाना इसमें आसान है।
एक आम गलती यह है कि फोन की स्टोरेज भरने पर लोग पुरानी फोटो हटा देते हैं और बैकअप लेना भूल जाते हैं। Settings में जाकर फोन का Google बैकअप चालू करें, और फोटो के लिए Google Photos का बैकअप भी देख लें।
क्या बैकअप में रखें
- फोटो और वीडियो।
- दस्तावेज़ और स्कैन की हुई कॉपियाँ।
- Contacts की सूची।
- कुछ ज़रूरी स्क्रीनशॉट।
महीने में एक बार जाँच लें कि बैकअप ठीक से हो रहा है या नहीं। स्टोरेज भर जाने पर बैकअप चुपचाप रुक भी सकता है।
4. नोट्स ऐप जो हर डिवाइस पर साथ चले
कोई विचार, खरीदारी की सूची, किसी का पता या मीटिंग की बातें, ये सब लिखने के लिए एक अच्छा नोट्स ऐप चाहिए। Google Keep इसके लिए ठीक है। इसका इंटरफ़ेस सीधा है, नोट जल्दी बन जाता है और समय के हिसाब से याद दिलाने की सुविधा भी है। बोलकर नोट लिखना भी आसान है।
कई लोग फोन के डिफ़ॉल्ट नोट्स ऐप में ही लिखते रहते हैं और फोन बदलते समय सब खो बैठते हैं। Keep के नोट आपके Google खाते से जुड़े रहते हैं, तो किसी भी डिवाइस से खुल जाते हैं।
घर की किराने की सूची भी Keep में बन सकती है। बाज़ार में फोन खोलकर चीज़ें टिक करते जाइए। अगर आप वह सूची साझा कर दें, तो घर का कोई भी सदस्य उसमें सामान जोड़ सकता है।
इस्तेमाल के तरीके
- अलग-अलग labels बनाएँ, जैसे “घर”, “ऑफिस” और “आइडिया”।
- ज़रूरी काम के लिए तारीख और समय वाला reminder लगाएँ।
- लंबे नोट्स में रंग से फर्क करें।
Keep का widget होम स्क्रीन पर रखें। एक टैप में नया नोट शुरू हो जाता है, और यह छोटी आदत काफी काम आती है।
5. पेमेंट ऐप जो रोज़ काम आए
भारत में अब UPI के बिना काम चलाना मुश्किल है। Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप आम तौर पर हर जगह चलते हैं। किसी एक को मुख्य ऐप बनाएँ और दूसरे को बैकअप की तरह रखें, क्योंकि कभी-कभी किसी एक में तकनीकी दिक्कत आ जाती है। इनमें से कोई भी ऐप आपके मोबाइल नंबर वाले बैंक खाते से जुड़ता है।
अपने बैंक का आधिकारिक ऐप भी install करें। बैलेंस देखने और खाते की जानकारी के लिए वह काम आता है। BHIM ऐप भी सरकारी पहल है, पर रोज़ के इस्तेमाल में ज़्यादातर लोग ऊपर बताए ऐप्स को ज़्यादा आसान पाते हैं।
सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग हर नए cashback वाले UPI ऐप को आज़माने लगते हैं। इससे फोन में भीड़ बढ़ती है और सुरक्षा का जोखिम भी। दो से ज़्यादा UPI ऐप्स रखने की ज़रूरत नहीं।
सुरक्षा के तरीके
- UPI PIN किसी को न बताएँ। बैंक का कोई कर्मचारी इसे कभी नहीं माँगता।
- ऐप में स्क्रीन लॉक या fingerprint लगाकर रखें।
- पैसे पाने के लिए आपको कभी PIN डालने या QR स्कैन करने की ज़रूरत नहीं होती। कोई ऐसा कहे तो धोखे की संभावना है।
- भुगतान से पहले नाम और रकम ध्यान से पढ़ें।
पेमेंट ऐप्स को Play Store से अपडेट करते रहें, क्योंकि पुराने वर्शन में सुरक्षा की कमियाँ हो सकती हैं।
6. मैसेजिंग ऐप्स
WhatsApp तो लगभग हर किसी के पास होता है, इसलिए इसे install करना न भूलें। साथ में Telegram भी फायदेमंद है। उसमें channels, bots और बड़े ग्रुपों के लिए बेहतर सुविधाएँ हैं, और कई खबर वाले और पढ़ाई वाले ग्रुप वहीं सक्रिय रहते हैं।
ऑफिस या स्कूल के ग्रुपों के लिए Slack या Microsoft Teams इस्तेमाल हो सकता है, पर यह आपके संस्थान पर निर्भर करता है। निजी इस्तेमाल के लिए WhatsApp और Telegram काफी हैं।
WhatsApp का बैकअप सबसे पहले चालू करें, वरना फोन खोने या खराब होने पर सारी चैट चली जाएँगी। बैकअप कितने समय में हो, यह अपनी पसंद से चुनें, और वीडियो शामिल करने का विकल्प सोच-समझकर रखें, क्योंकि उससे बैकअप का आकार बहुत बढ़ जाता है। WhatsApp बैकअप आपके Google खाते की जगह में गिना जा सकता है, इसलिए स्टोरेज का ध्यान रखें।
ग्रुप संभालने के तरीके
- अनजान नंबरों के ग्रुप को mute कर दें।
- Profile photo और status की privacy settings जाँच लें।
- ज़रूरी चैट को pin कर दें, ताकि वे ऊपर रहें।
Telegram पर बहुत सारे अनजान ग्रुप जोड़ने से सूचनाओं की बाढ़ आ जाती है। सिर्फ उन्हीं channels से जुड़ें जो सच में काम के हों।
7. संगीत और पॉडकास्ट
Spotify और YouTube Music दोनों लोकप्रिय विकल्प हैं। Spotify का मुफ्त वर्शन विज्ञापनों के साथ आता है, जबकि ऑफलाइन डाउनलोड जैसी सुविधाएँ सशुल्क योजना में मिलती हैं। YouTube Music का फायदा यह है कि YouTube पर मिलने वाले कई लाइव और पुराने वर्शन भी वहाँ मिल जाते हैं।
पॉडकास्ट के लिए Google Podcasts नाम का ऐप अब बंद हो चुका है, इसलिए अगर किसी पुरानी सलाह में उसका नाम आए तो उसे न खोजें। अब पॉडकास्ट Spotify या YouTube Music में सुने जा सकते हैं, और हिंदी में खबर, हास्य और जानकारी वाले पॉडकास्ट काफी मिल जाते हैं।
भारतीय संगीत के लिए JioSaavn भी अच्छा विकल्प है, जिसमें हिंदी के साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं के गाने मिलते हैं। Wynk Music जैसे कुछ पुराने ऐप बंद हो चुके हैं, इसलिए अगर आपके पुराने फोन की playlist वहाँ थी, तो उसे किसी चालू ऐप में बनाना पड़ेगा।
एक आम गलती यह है कि फोन की स्टोरेज भरने के डर से लोग गाने डाउनलोड ही नहीं करते और हर बार स्ट्रीम करते हैं, जिससे डेटा जल्दी खत्म होता है। Wi-Fi पर कुछ playlists डाउनलोड कर लें, सफर में काम आएँगी।
डेटा बचाने के तरीके
- स्ट्रीमिंग की क्वालिटी normal या low पर रखें।
- डाउनलोड सिर्फ Wi-Fi पर करें।
- ऐप की settings में मोबाइल डेटा पर चलने की सीमा देख लें।
8. मैप्स और नेविगेशन
Google Maps बिना सोचे install कर लें। भारत में इसकी पहुँच बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक अच्छी है। लाइव ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन के रास्ते और ऑफलाइन नक्शे, ये तीन सुविधाएँ सबसे काम की हैं।
ऑफलाइन नक्शे का इस्तेमाल ज़रूर करें। अपने शहर का नक्शा Wi-Fi पर डाउनलोड कर लें, ताकि नेटवर्क कमज़ोर होने पर भी रास्ता दिखता रहे। यह अनजान इलाके में जाते समय खास तौर पर काम आता है।
लोग अक्सर बैटरी जल्दी खत्म होने की शिकायत करते हैं, जबकि Maps को हर समय location की इजाज़त दे रखी होती है। Location permission को “ऐप इस्तेमाल करते समय” पर रखें, “हमेशा” पर नहीं। इससे बैटरी भी बचेगी और निजता भी।
काम की सुविधाएँ
- घर और ऑफिस के पते सेव करके उन्हें नाम दें।
- पार्किंग की जगह सेव करें, ताकि गाड़ी ढूँढनी न पड़े।
- सार्वजनिक परिवहन वाले मोड में बस और मेट्रो का समय देखें।
- रेस्तरां या दुकान जाने से पहले समीक्षाएँ पढ़ें।
iPhone वाले Apple Maps भी इस्तेमाल कर सकते हैं, पर भारत में बहुत से लोग Google Maps को ज़्यादा भरोसेमंद पाते हैं।
9. शॉपिंग और डिलीवरी ऐप्स
Amazon और Flipkart शॉपिंग के लिए आम पसंद हैं, और दोनों पर दाम की तुलना करना अच्छा रहता है। किराने के लिए Blinkit या BigBasket जैसे ऐप आपके शहर में उपलब्ध हों, तो install करें।
खाने के ऑर्डर के लिए Swiggy और Zomato दोनों लोकप्रिय हैं। कभी एक पर छूट होती है, तो कभी दूसरे पर। हालाँकि बहुत सारे डिलीवरी ऐप रखने से फोन भारी लग सकता है, क्योंकि ये सूचनाएँ भेजते रहते हैं।
इन ऐप्स की सूचनाएँ संभालना सीखें। सिर्फ ऑर्डर की जानकारी वाली सूचनाएँ चालू रखें और प्रचार वाली बंद कर दें। Settings में सूचनाओं की अलग-अलग श्रेणियाँ मिल जाती हैं।
पैसे बचाने के तरीके
- कोई भी चीज़ खरीदने से पहले दो जगह दाम देख लें।
- डिलीवरी शुल्क पर ध्यान दें। कई बार न्यूनतम ऑर्डर बढ़ाने पर शुल्क माफ हो जाता है।
- बड़ी खरीदारी के लिए त्योहार की सेल का इंतज़ार करें।
- भुगतान से पहले कुल रकम और अतिरिक्त शुल्क ध्यान से पढ़ लें।
याद रखें, ये ऐप आपकी location और खोज की जानकारी रखते हैं। हर ऐप को contacts और स्टोरेज की इजाज़त न दें।
10. छोटे काम के ऐप्स जो अक्सर छूट जाते हैं
कुछ छोटे ऐप install करने पर बहुत काम आते हैं। Files by Google एक हल्का फाइल मैनेजर है, जो फालतू फाइलें साफ करने और फाइलें साझा करने में मदद करता है। दस्तावेज़ स्कैन करने के लिए Adobe Scan ठीक है, और Google Drive ऐप में भी स्कैन करने की सुविधा मिलती है। दोनों कागज़ को साफ PDF में बदल देते हैं।
QR कोड स्कैन करने के लिए अब अलग ऐप की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि ज़्यादातर फोन के कैमरे में यह सुविधा पहले से होती है। अगर आपके फोन में न हो, तो Google Lens आज़मा सकते हैं, जो Google ऐप और कैमरे के कई विकल्पों में मिल जाता है। यह लिखा हुआ टेक्स्ट पढ़ने और अनुवाद करने में भी काम आता है।
कैलकुलेटर, टॉर्च और यूनिट कन्वर्टर जैसी चीज़ें फोन में पहले से होती हैं, इसलिए इनके लिए अलग ऐप डालने की ज़रूरत नहीं। बस इनके widgets को होम स्क्रीन पर सजा लें।
काम की चीज़ें
- Files by Google: फालतू फाइलें साफ करना और फाइलें भेजना।
- Adobe Scan या Drive स्कैन: दस्तावेज़ों की डिजिटल कॉपी।
- Google Lens: टेक्स्ट कॉपी करना, अनुवाद और चीज़ें खोजना।
- Google Translate: अंग्रेज़ी से हिंदी और दूसरी भाषाओं में अनुवाद।
Play Store पर बहुत विज्ञापनों के साथ आने वाले “cleaner” या “battery saver” ऐप्स से दूर रहें। इनमें से बहुत से बेकार होते हैं और कुछ आपकी जानकारी भी इकट्ठा करते हैं। Android की अपनी सेटिंग्स ही ज़्यादातर काम के लिए काफी हैं।
नया फोन सेट करते समय की चेकलिस्ट
यह एक सीधी-सादी सूची है, जिसे एक-एक करके पूरा करते जाइए।
- Google खाते में login करें और sync चालू करें।
- WhatsApp install करके अपना बैकअप restore करें।
- फोन का Google बैकअप और फोटो का बैकअप चालू करें।
- UPI ऐप install करके बैंक खाता जोड़ें।
- पासवर्ड मैनेजर सेट करें और autofill चालू करें।
- ब्राउज़र install करके उसे डिफ़ॉल्ट बनाएँ।
- Maps में घर और ऑफिस के पते सेव करें।
- म्यूज़िक ऐप में Wi-Fi पर कुछ playlists डाउनलोड करें।
- नोट्स ऐप में अपनी ज़रूरी सूचियाँ बनाएँ।
- सभी ऐप्स की सूचनाओं की settings जाँचें।
- जिन पहले से आए ऐप्स की ज़रूरत नहीं, उन्हें disable करें।
- Screen lock और fingerprint लगाना न भूलें।
ये सारे काम पूरे करने में आम तौर पर एक घंटे से ज़्यादा नहीं लगता। इसके बाद आपका नया फोन काम के लिए तैयार है। कोई भी नया ऐप डालने से पहले सोचें कि वह सच में काम का है या सिर्फ फोन में जगह घेरेगा। कम ऐप्स, पर सही ऐप्स, यही सबसे अच्छा नियम है।







