मान लीजिए किसी ने सफ़ाई करते-करते गलती से फ़ोन का पूरा कैमरा फ़ोल्डर डिलीट कर दिया, और उसमें परिवार की शादी की सारी तस्वीरें थीं। घबराहट में पहला काम होता है Play Store खोलकर “photo recovery” ढूँढ़ना। फिर सवाल उठता है कि ये ऐप सच में काम करते हैं या बस दिखावा हैं।
सीधा जवाब यह है कि कुछ हालात में तरीके काम करते हैं और कुछ में नहीं। सबसे अहम बात यह है कि फ़ोटो हटने के बाद आपके पहले कुछ कदम ही तय करते हैं कि वापसी की उम्मीद बचेगी या नहीं। इस लेख में बिना झूठे वादों के बताया गया है कि रिकवरी ऐप कैसे चलते हैं, कहाँ काम आते हैं और पहले कौन-सी आसान जगहें देख लेनी चाहिए।
फ़ोटो डिलीट करने पर असल में क्या होता है
पुराने ज़माने में माना जाता था कि फ़ोटो डिलीट करने पर फ़ोन सिर्फ़ उसका पता मिटाता है और असली डेटा तब तक पड़ा रहता है जब तक उस जगह पर कुछ नया न लिख जाए। यह बात SD कार्ड और पुराने फ़ोन के लिए काफ़ी हद तक सही थी। लेकिन आज के ज़्यादातर एंड्रॉइड फ़ोन में इंटरनल स्टोरेज एन्क्रिप्टेड रहती है और हटाई गई जगह को सिस्टम अपने आप साफ़ भी करता रहता है। इसलिए इंटरनल स्टोरेज से हटाई गई फ़ोटो को सीधे वापस लाना अक्सर बहुत मुश्किल, कई बार लगभग नामुमकिन होता है।
इसका मतलब यह नहीं कि सब खत्म हो गया। फ़ोटो की एक कॉपी कई और जगह हो सकती है: Google Photos, गैलरी का रीसायकल बिन, WhatsApp की चैट, क्लाउड स्टोरेज या कंप्यूटर। रिकवरी ऐप आमतौर पर आखिरी उपाय होते हैं, पहला नहीं। और जितना ज़्यादा आप फ़ोन चलाते हैं, उतनी कम उम्मीद रहती है, क्योंकि हर नई फ़ोटो, वीडियो या ऐप स्टोरेज में जगह घेरता है।
एक और बात समझ लेना फ़ायदेमंद है। डिलीट हुई फ़ोटो के बारे में तीन सवाल खुद से पूछिए: फ़ोटो कहाँ थी (इंटरनल या SD कार्ड), कब हटी (अभी या कई हफ़्ते पहले) और उसके बाद फ़ोन कितना चला। इन तीनों के जवाब से अंदाज़ा लग जाता है कि आगे कितनी मेहनत करना ठीक रहेगा। अगर फ़ोटो अभी-अभी हटी है, SD कार्ड में थी और फ़ोन बंद पड़ा है, तो उम्मीद अच्छी है। अगर पिछले महीने की इंटरनल स्टोरेज वाली फ़ोटो है, तो सबसे पहले बैकअप और दूसरी जगहें देखना ही समझदारी है।
सबसे पहले क्या करें, और क्या बिल्कुल न करें
फ़ोटो गायब दिखे तो सबसे पहले हाथ रोकिए। जल्दबाज़ी में की गई हर हरकत हालात बिगाड़ सकती है। नीचे दिए कदम इसी क्रम से आज़माइए।
- कैमरे से नई फ़ोटो या वीडियो लेना बंद कर दीजिए और बड़ी फ़ाइलें डाउनलोड मत कीजिए।
- फ़ोन को कुछ देर के लिए एयरप्लेन मोड पर रखिए, ताकि ऐप अपडेट और ऑटो-डाउनलोड बीच में डेटा न लिखें। बस इतना ध्यान रखें कि आगे Google Photos जैसी जगह देखने के लिए इंटरनेट फिर चालू करना पड़ेगा।
- एक साथ कई रिकवरी ऐप इंस्टॉल मत कीजिए। हर इंस्टॉलेशन भी स्टोरेज में लिखता है।
- फ़ोन का फ़ैक्टरी रीसेट बिल्कुल मत कीजिए। इससे पुराना डेटा वापस नहीं आता, उल्टे रास्ते और बंद हो जाते हैं।
- अगर फ़ोटो SD कार्ड में थी, तो कार्ड को फ़ोन से निकालकर सुरक्षित रख दीजिए।
इसके बाद शांति से आसान जगहें खंगालिए। ज़्यादातर मामलों में फ़ोटो वहीं मिल जाती है जहाँ आपने सोचा भी नहीं होता।
पहले ये जगहें देखिए: Google Photos और गैलरी का बिन
अगर आपके फ़ोन में Google Photos का बैकअप चालू था, तो आपकी फ़ोटो शायद क्लाउड में सुरक्षित है। ऐप खोलिए, नीचे “Library” में जाइए और “Bin” या “Trash” देखिए। हटाई गई फ़ोटो वहाँ कुछ हफ़्तों तक रहती हैं (बैकअप हो चुकी फ़ोटो आमतौर पर लगभग दो महीने तक)। जो चाहिए उन्हें चुनकर “Restore” दबाइए और वे फ़ोन की गैलरी में लौट आएँगी। अवधि बीतने के बाद वे हमेशा के लिए हट जाती हैं, इसलिए देर मत कीजिए।
कई बार लोगों को पता ही नहीं होता कि बैकअप चालू था। इसलिए Google Photos खोलकर एक बार देख लीजिए कि वहाँ आपकी पुरानी तस्वीरें दिख रही हैं या नहीं। अगर दिख रही हैं, तो जो फ़ोटो “डिलीट” हुई लगती थी, वह शायद बस फ़ोन से हटी है, क्लाउड से नहीं।
कई कंपनियों के फ़ोन की गैलरी में भी “Recently deleted” या “Recycle bin” जैसा फ़ोल्डर होता है, जहाँ हटाई गई फ़ोटो एक तय समय तक रखी जाती है। इसका नाम और जगह फ़ोन के ब्रांड और गैलरी ऐप के हिसाब से बदलती है, इसलिए गैलरी के मेन्यू या सेटिंग में देख लीजिए। Files by Google जैसे फ़ाइल मैनेजर में भी अक्सर एक ट्रैश या बिन मिलता है।
फ़ोटो कहीं और भी हो सकती है
अगर वह फ़ोटो कभी किसी को भेजी या किसी ग्रुप में डाली थी, तो उसकी कॉपी वहाँ मिल सकती है। WhatsApp में चैट खोलकर फ़ोटो दोबारा सेव की जा सकती है, बशर्ते मैसेज डिलीट न हुआ हो। परिवार के ग्रुप में डाली गई तस्वीरें अक्सर दूसरे लोगों के फ़ोन में भी पड़ी होती हैं, तो माँग लेना सबसे आसान तरीका है। ध्यान रहे कि चैट से दोबारा मिली फ़ोटो की क्वालिटी थोड़ी घट सकती है, क्योंकि ऐप भेजते समय उसे छोटा कर देता है।
इसके अलावा कंप्यूटर, लैपटॉप, पेन ड्राइव, Google Drive, OneDrive या Dropbox जैसी जगहें भी देख लीजिए। कुछ लोग पुराने फ़ोन से फ़ोटो कभी कंप्यूटर पर कॉपी कर देते हैं और भूल जाते हैं। ईमेल में अटैचमेंट के तौर पर भेजी गई फ़ोटो भी “Sent” फ़ोल्डर में मिल सकती है। ये सब देखने में पाँच-दस मिनट लगते हैं, पर बहुत बार काम यहीं हो जाता है।
SD कार्ड से रिकवरी की संभावना
अगर फ़ोटो SD कार्ड में थी, तो उम्मीद इंटरनल स्टोरेज से बेहतर होती है। कार्ड में डेटा उस तरह एन्क्रिप्टेड नहीं रहता, और हटाने के बाद भी कई बार उसके निशान बचे रहते हैं। सबसे सही तरीका यह है कि कार्ड को फ़ोन से निकाल दें, ताकि उस पर कुछ नया न लिखे, और फिर किसी कार्ड रीडर से जोड़कर स्कैन करें। कार्ड को दोबारा फ़ोन में डालकर चलाते रहने से मौका घटता है।
कार्ड पर कभी “फ़ॉर्मेट” या “रिपेयर” जैसे विकल्प मत चलाइए, चाहे फ़ोन या कंप्यूटर कितना भी सुझाए। अगर कार्ड टूटा या पानी में भीगा है, तो सामान्य सॉफ़्टवेयर से शायद काम न बने और केवल पेशेवर डेटा रिकवरी सर्विस ही मदद कर पाए, जो अक्सर महँगी होती है और जिसमें नतीजे की गारंटी नहीं होती। इसलिए यह देखिए कि फ़ोटो की कीमत उस खर्च के लायक है या नहीं।
DiskDigger जैसे ऐप कैसे काम करते हैं
DiskDigger एंड्रॉइड पर सबसे ज़्यादा जाना जाने वाला फ़ोटो रिकवरी ऐप है। बिना रूट वाली बुनियादी स्कैन में यह मुख्य रूप से कैश और थंबनेल जैसी जगहों से फ़ोटो ढूँढ़ता है, और आमतौर पर जो मिलता है वह छोटे आकार और कम क्वालिटी की कॉपी होती है। रूट किए हुए फ़ोन पर यह गहरी स्कैन कर सकता है, पर रूट करना अपने आप में जोखिम भरा है। इससे फ़ोन की वारंटी जा सकती है, बैंकिंग ऐप चलने बंद हो सकते हैं और गलत कदम से डेटा और बिगड़ सकता है। इसलिए सिर्फ़ फ़ोटो के लिए फ़ोन रूट करने की सलाह हम नहीं देते।
इस्तेमाल का सीधा तरीका
- ऐप को सिर्फ़ Play Store से इंस्टॉल कीजिए।
- खोलने पर फ़ोटो की बुनियादी स्कैन वाला विकल्प चुनिए।
- स्कैन पूरी होने तक फ़ोन को अकेला छोड़ दीजिए।
- जो फ़ोटो साफ़ दिखें, सिर्फ़ उन्हें चुनिए।
- बची हुई फ़ोटो को सीधे अपने क्लाउड स्टोरेज या किसी दूसरे फ़ोल्डर में सेव कीजिए। उसी जगह पर बार-बार लिखने से बचिए।
ऐप के अलग-अलग वर्शन में विकल्पों के नाम थोड़े बदल सकते हैं, पर तरीका वही रहता है। उम्मीद के मामले में इतना समझ लीजिए कि कैश या थंबनेल से मिली फ़ोटो अक्सर अधूरी क्वालिटी की होती है। याद के तौर पर देखने के लिए यह ठीक है, पर प्रिंट करवाने लायक शायद न हो।
कैश और थंबनेल से मिली कॉपी का एक फ़ायदा भी है: अगर आपको बस यह पक्का करना है कि कौन-सी फ़ोटो कौन-सी थी, तो छोटी कॉपी भी पहचान के लिए काफ़ी होती है। फिर आप उसी फ़ोटो को WhatsApp चैट या किसी रिश्तेदार के फ़ोन से बेहतर क्वालिटी में माँग सकते हैं। यानी रिकवरी ऐप और दूसरी जगहें एक-दूसरे की जगह नहीं, एक-दूसरे की मदद करते हैं।
रिकवरी ऐप चुनते समय ये सावधानियाँ रखिए
Play Store पर ऐसे ऐप की भरमार है, और उनमें से सब भरोसे लायक नहीं होते। कुछ बड़े-बड़े दावे करते हैं कि “सब कुछ वापस ला देंगे”, पर असल में वही कैश की फ़ोटो दिखाते हैं जो आपके पास पहले से थीं। कुछ ऐप स्कैन के नतीजे दिखाकर रिकवर करने के लिए सब्सक्रिप्शन माँगते हैं। यह अपने आप में गलत नहीं, पर खरीदने से पहले ध्यान से देखिए कि वाकई वह फ़ोटो दिख रही है जो आपको चाहिए और उसका प्रीव्यू साफ़ है।
इन बातों पर नज़र रखिए।
- डेवलपर का नाम और रिव्यू देखिए, खासकर हाल के रिव्यू, और शिकायतों वाले रिव्यू पहले पढ़िए।
- ऐप ऐसी अनुमतियाँ न माँगे जो फ़ोटो रिकवरी से मेल न खाती हों, जैसे कॉन्टैक्ट या कॉल लॉग।
- जो ऐप “100% रिकवरी” का वादा करे, उससे दूर रहिए। कोई भी ईमानदार टूल यह गारंटी नहीं दे सकता।
- प्रीव्यू में फ़ोटो काली, आधी या टूटी हो, तो फ़ाइल बिगड़ चुकी है और उसके लिए पैसे देना बेकार है।
- एक ही ऐप आज़माइए। एक के बाद एक कई ऐप इंस्टॉल करने से नुकसान हो सकता है।
अगर आपका फ़ोन किसी बड़े ब्रांड का है, तो कंपनी की अपनी सर्विस या सपोर्ट ऐप भी जाँच लीजिए, क्योंकि कुछ ब्रांड अपने क्लाउड में बैकअप रखते हैं।
वे गलतियाँ जो फ़ोटो को हमेशा के लिए मिटा देती हैं
रिकवरी की कोशिश में लोग अक्सर वही गलतियाँ दोहराते हैं। इन्हें पहले से जान लेना बहुत काम आता है।
- घबराकर कई रिकवरी ऐप इंस्टॉल कर देना।
- उसी फ़ोन में लगातार वीडियो और ऐप डाउनलोड करते रहना।
- फ़ोन को फ़ैक्टरी रीसेट करना यह सोचकर कि इससे सब ठीक हो जाएगा।
- SD कार्ड को फ़ॉर्मेट करना या “रिपेयर” चलाना।
- स्कैन के बीच में फ़ोन बंद या रीस्टार्ट करना, या बैटरी कम होने देना। स्कैन से पहले बैटरी ठीक-ठाक चार्ज रखिए।
- सिर्फ़ ऑनलाइन वीडियो देखकर किसी अनजान टूल को फ़ोन में रूट या फ़्लैश करना।
कुछ संकेत बताते हैं कि अब फ़ोटो की वापसी की संभावना बहुत कम है। अगर हटाए हुए कई हफ़्ते गुज़र चुके हैं और फ़ोन रोज़ चल रहा है, अगर बीच में रीसेट हो चुका है, या अगर प्रीव्यू बार-बार टूटी तस्वीरें ही दिखा रहा है, तो उम्मीद बाँधकर पैसे और समय खर्च मत कीजिए। ऐसे में जो वापस मिला है उसे सँभालिए और आगे के लिए बैकअप की आदत डालिए।
फ़ोटो खो जाने पर क्रम से यह चेकलिस्ट अपनाइए
नीचे की चेकलिस्ट को ऊपर से नीचे उसी क्रम में चलाइए। जल्दबाज़ी में कोई कदम छोड़िए मत।
- फ़ोन का इस्तेमाल कम से कम कीजिए, नई फ़ोटो और बड़े डाउनलोड रोक दीजिए।
- Google Photos का “Bin” या “Trash” खोलकर देखिए और वहाँ से Restore कीजिए।
- गैलरी के “Recently deleted” या रीसायकल बिन और Files by Google का ट्रैश जाँचिए।
- WhatsApp, ईमेल, Drive, कंप्यूटर और दोस्तों-परिवार के फ़ोन में कॉपी खोजिए।
- अगर फ़ोटो SD कार्ड में थी, तो कार्ड निकालकर सुरक्षित रखिए और कार्ड रीडर से स्कैन कीजिए।
- इंटरनल स्टोरेज के लिए सिर्फ़ एक भरोसेमंद ऐप आज़माइए और प्रीव्यू देखकर ही चुनिए।
- जो फ़ोटो मिलें, उन्हें तुरंत क्लाउड या दूसरी जगह कॉपी कर लीजिए।
- भविष्य के लिए Google Photos या किसी और क्लाउड का ऑटो बैकअप चालू कर दीजिए और महीने में एक बार जाँचिए कि वह चल रहा है।
याद रखिए, सबसे अच्छी “रिकवरी” वह है जिसकी नौबत ही न आए। बैकअप चालू रखना एक बार की मेहनत है, और उसके बाद अगली बार गलती से कुछ डिलीट हो जाए तो बस एक बटन दबाकर तस्वीरें वापस मिल जाती हैं।







