फ़ोन को हैकिंग से बचाने वाली 7 ज़रूरी सेटिंग्स और ऐप्स

फ़ोन की सात आसान सेटिंग्स और आदतें, जैसे ऐप की अनुमति, 2FA, अपडेट, सिम की सुरक्षा और पब्लिक Wi-Fi की सावधानी, जिनसे आप ठगी और हैकिंग का खतरा काफी घटा सकते हैं।

फ़ोन को हैकिंग से बचाने वाली 7 ज़रूरी सेटिंग्स और ऐप्स

सोचिए, सुबह-सुबह आपकी आँख खुलती है और फ़ोन की स्क्रीन पर एक अजीब सा मैसेज चमक रहा है। लिखा है कि आपका KYC अपडेट नहीं हुआ है और खाता आज रात बंद हो जाएगा, नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। या फिर आपने देखा कि आपके बैंक अकाउंट से रातों-रात कुछ छोटे-छोटे पैसे कट गए, जो आपने कभी खर्च ही नहीं किए। ये किसी फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि रोज़ सुनाई देने वाली ठगी के तरीके हैं। हम सब अपना पूरा जीवन, पैसे से लेकर निजी तस्वीरें तक, इस छोटी सी डिवाइस में रखते हैं, लेकिन उसकी सुरक्षा पर उतना ध्यान नहीं देते जितना घर के ताले पर देते हैं।

अच्छी बात यह है कि हैकर हमेशा कोई जादुई ट्रिक इस्तेमाल नहीं करते। अक्सर वे हमारी छोड़ी हुई खिड़कियों और खुले दरवाजों से अंदर आते हैं। अगर आप फ़ोन की कुछ बेसिक सेटिंग्स को आज ठीक कर लें और कुछ समझदारी भरी आदतें अपना लें, तो आप हैकिंग के शिकार होने से काफी हद तक बच सकते हैं। यह लेख आपको ऐसी ही सात ज़रूरी चीज़ों के बारे में आसान भाषा में बताएगा, जिन्हें करने में आपको बस कुछ ही मिनट लगेंगे।

1. ऐप की Permissions पर नज़र रखें

जब भी आप कोई नया ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो वह आपसे कई तरह की अनुमतियाँ माँगता है। जैसे कि कैमरा इस्तेमाल करने की, माइक्रोफोन चालू करने की, आपकी लोकेशन जानने की या आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट पढ़ने की। हममें से ज़्यादातर लोग बिना पढ़े ही ‘Allow’ या ‘Agree’ बटन दबा देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। एक साधारण सी टॉर्च ऐप को आपकी लोकेशन या कॉन्टैक्ट्स की ज़रूरत नहीं होती। अगर कोई गेम आपसे आपके SMS पढ़ने की अनुमति माँग रहा है, तो समझ जाइए कि कुछ गड़बड़ है।

Android फ़ोन में सेटिंग्स में जाकर ‘Privacy’ या ‘Permission Manager’ खोलिए (नाम फ़ोन कंपनी के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है)। वहाँ आपको हर परमिशन की एक लिस्ट मिलेगी, जैसे कि Camera, Location, Microphone। उस लिस्ट में जाकर देखिए कि कौन से ऐप्स ने वह परमिशन ले रखी है। अगर कोई वीडियो प्लेयर आपके माइक्रोफोन की अनुमति लिए बैठा है, तो उसे तुरंत बंद कर दीजिए। इसी तरह, किसी शॉपिंग ऐप को आपकी बॉडी सेंसर की जानकारी की ज़रूरत नहीं है।

  • नया ऐप इंस्टॉल करते समय हमेशा सोचें कि क्या यह ऐप वाकई इस चीज़ की माँग कर सकता है।
  • महीने में एक बार अपने फ़ोन की Permission Manager सेटिंग में जाकर सफाई करें।
  • जहाँ ज़रूरी न हो, लोकेशन की अनुमति ‘While using the app’ पर रखें, ‘Always’ पर नहीं। इससे बैटरी भी बचती है और प्राइवेसी भी।

कई बार सस्ते या अनजान ऐप्स आपके डेटा को चुराकर पीछे से विज्ञापन कंपनियों को बेचते हैं। यह सीधे तौर पर आपके पैसे की चोरी नहीं है, लेकिन आपकी निजी जानकारी गलत हाथों में पहुँचना बाद की ठगी का रास्ता खोल सकता है। इसलिए जो ऐप आप इस्तेमाल नहीं करते, उसे अनइंस्टॉल कर देना सबसे अच्छा सुरक्षा उपाय है।

2. Play Protect और सिर्फ भरोसेमंद स्टोर का इस्तेमाल

Android का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कहीं से भी APK फाइल डाउनलोड करके ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी है। कई बार हमें किसी पेड ऐप का फ्री वर्जन किसी वेबसाइट पर मिल जाता है, या कोई ऐसा मॉडिफाइड गेम मिलता है जिसमें अनलिमिटेड सिक्के होते हैं। ये मॉडिफाइड APK फाइलें ठगों का पसंदीदा रास्ता हैं। इनमें कई बार कोई छिपा हुआ मैलवेयर या स्पाइवेयर डाला होता है जो आपके बैंकिंग ऐप्स पर नज़र रखता है। भारत में बैन हो चुके ऐप्स को किसी APK साइट से डालना भी इसी जोखिम में आता है।

हमेशा कोशिश करें कि ऐप सिर्फ Google Play Store से ही इंस्टॉल करें। Play Store पर भी कभी-कभी खराब ऐप्स आ जाते हैं, लेकिन वहाँ Google का एक सुरक्षा कवच होता है जिसे Play Protect कहते हैं। यह आपके फ़ोन में इंस्टॉल ऐप्स को समय-समय पर स्कैन करता रहता है और अगर उसे कुछ संदिग्ध लगता है तो आपको चेतावनी देता है या ऐप को हटा भी देता है। आपको बस यह चेक करना है कि आपके फ़ोन में Play Protect ऑन है या नहीं। इसके लिए Play Store खोलें, अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें, और Play Protect मेन्यू में जाकर स्कैन चला दें।

अगर आप किसी बैंक का ऐप या पैसों से जुड़ा कोई भी ऐप इस्तेमाल करते हैं, तो साइडलोडिंग यानी बाहर से APK डालने की आदत बिल्कुल छोड़ दें। एक गलत APK आपके बैंक खाते को खाली करने के लिए काफी है। iPhone यूज़र्स के लिए यह थोड़ा आसान है क्योंकि Apple का App Store काफी सख्त है, लेकिन Android पर ज़िम्मेदारी आपकी खुद की है।

3. Two-Factor Authentication (2FA) को हर जगह चालू करें

मान लीजिए किसी को आपका पासवर्ड पता चल गया। अगर आपने Two-Factor Authentication यानी 2FA चालू कर रखा है, तो भी वह आपके अकाउंट में घुस नहीं पाएगा। 2FA एक दूसरे ताले की तरह है। जब आप पासवर्ड डालते हैं, तो आपके फ़ोन पर एक OTP या कोड आता है, या आपको एक Authenticator ऐप में नंबर देखना होता है। उसके बिना अकाउंट नहीं खुलेगा। यह सबसे आसान और सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार है।

सबसे पहले अपने Google अकाउंट में 2FA ऑन करें, क्योंकि आपका पूरा Android फ़ोन उसी से बंधा होता है। उसके बाद अपने WhatsApp, Instagram, Facebook और बैंकिंग ऐप्स में जाकर Two-Step Verification चालू करें। WhatsApp में यह सेटिंग बहुत ज़रूरी है क्योंकि अगर कोई आपका सिम कार्ड क्लोन कर लेता है या आपका OTP पढ़ लेता है, तो भी बिना उस 6 अंकों के पिन के वह आपका अकाउंट दूसरे फ़ोन पर नहीं चला पाएगा।

  • SMS से OTP मिलना सुविधाजनक है, लेकिन SIM swap जैसी ठगी में यह जोखिम बन सकता है।
  • Google Authenticator या Microsoft Authenticator जैसे ऐप्स ज़्यादा सुरक्षित होते हैं क्योंकि कोड आपके फ़ोन के अंदर बनता है, नेटवर्क से नहीं आता।
  • जहाँ बैंक या ईमेल यह विकल्प देते हों, वहाँ Authenticator ऐप चुनना बेहतर है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि 2FA चालू करने से हर बार लॉगिन करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन सच यह है कि ज़्यादातर ऐप्स आपके भरोसेमंद डिवाइस को याद रख लेते हैं और बार-बार कोड नहीं माँगते। जो थोड़ी सी असुविधा है, वह अकाउंट चोरी होने के बाद के सिरदर्द से बहुत कम है।

4. लॉक स्क्रीन और स्मार्ट लॉक का सही इस्तेमाल

आपका फ़ोन चोरी हो जाए या कहीं गिर जाए, तो सबसे पहली दीवार लॉक स्क्रीन होती है। अगर आपने कोई पिन, पैटर्न या फिंगरप्रिंट नहीं लगाया है, तो समझिए आपने अपनी पूरी डिजिटल ज़िंदगी खुले में छोड़ दी है। कोई भी उठाकर आपकी गैलरी, आपके मैसेज और आपके ईमेल पढ़ सकता है। इसलिए सबसे पहले एक मजबूत पिन या पासवर्ड सेट करें। पैटर्न से छह अंकों का पिन बेहतर है, क्योंकि स्क्रीन पर उंगलियों के निशान से पैटर्न का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कई Android फ़ोन में ‘Smart Lock’ जैसी सुविधा होती है, जो फ़ोन को कुछ खास स्थितियों में खुला रखती है, जैसे जब वह किसी भरोसेमंद ब्लूटूथ डिवाइस से जुड़ा हो। यह सुविधाजनक तो है, लेकिन जोखिम भी है। अगर आपका फ़ोन भीड़भाड़ वाली जगह पर चोरी होता है और आपके ब्लूटूथ ईयरबड्स से जुड़ा रहने की वजह से अनलॉक रहता है, तो चोर आसानी से अंदर घुस सकता है। बैंकिंग वाले फ़ोन पर इसे बंद रखना ही ठीक है।

  • लॉक स्क्रीन पर संवेदनशील नोटिफिकेशन छिपाना न भूलें। सेटिंग्स में जाकर Notifications को ‘Hide sensitive content’ पर कर दें।
  • अगर आप UPI ऐप्स जैसे Google Pay या PhonePe इस्तेमाल करते हैं, तो उन ऐप्स पर अलग से ऐप लॉक लगा लें।
  • Google की ‘Find Hub’ सुविधा (पहले इसका नाम ‘Find My Device’ था) को ऑन रखें। फ़ोन खोने पर आप उसे दूर से लॉक या मिटा सकते हैं।

अनजान कंप्यूटर या पब्लिक चार्जिंग पोर्ट से फ़ोन को जोड़ने में भी थोड़ा जोखिम रहता है, जिसे Juice Jacking कहते हैं। इसलिए जहाँ तक हो सके अपने चार्जर या पावर बैंक का ही इस्तेमाल करें। अगर फ़ोन जोड़ते ही ‘फ़ाइल ट्रांसफर’ जैसा सवाल आए, तो ‘सिर्फ चार्ज’ चुनें।

5. ब्राउज़र और पब्लिक Wi-Fi की सावधानी

मुफ्त का Wi-Fi हमें बहुत लुभाता है, चाहे वह रेलवे स्टेशन पर हो, किसी कैफे में हो या होटल में। लेकिन खुले यानी बिना पासवर्ड वाले नेटवर्क पर आप भरोसा नहीं कर सकते कि उसे कौन चला रहा है और उस पर और कौन जुड़ा है। नकली Wi-Fi नाम बनाकर लोगों को फँसाने के मामले भी होते हैं। इसलिए पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग और ऑनलाइन खरीदारी से बचें और कोई ज़रूरी पासवर्ड न डालें।

अगर आपको बाहर रहकर भी काम करना होता है, तो अपने मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करें। डेटा आजकल काफी सस्ता हो गया है और आपकी सुरक्षा के लिए वह कुछ रुपये खर्च करना समझदारी है। अगर पब्लिक Wi-Fi इस्तेमाल करना ही पड़े, तो भरोसेमंद कंपनी का VPN ऐप चुनें। VPN आपके डेटा को एक सुरंग में डाल देता है, जिससे बाहर वाला आपकी जानकारी नहीं पढ़ पाता। मगर बिना नाम वाले मुफ़्त VPN से बचें, क्योंकि कई बार वे खुद आपका डेटा बेचते हैं।

ब्राउज़र में भी सावधानी बरतें। Chrome में ‘Safe Browsing’ ऑन रखें। यह आपको खतरनाक वेबसाइटों पर जाने से पहले चेतावनी देता है। कभी भी उन लिंक पर क्लिक न करें जो SMS या WhatsApp पर आते हैं और कहते हैं कि आपने कोई इनाम जीता है या आपका बिजली का बिल बकाया है। ये फिशिंग लिंक होते हैं जो बिल्कुल असली वेबसाइट जैसे दिखते हैं, लेकिन आपका पासवर्ड चुरा लेते हैं।

  • किसी भी वेबसाइट का पता खुद टाइप करें, लिंक से न जाएँ।
  • https देखना अच्छा है, पर ठग भी https वाली नकली साइट बनाते हैं। इसलिए सिर्फ ताले पर भरोसा न करें, वेबसाइट का नाम ध्यान से पढ़ें।
  • ब्राउज़र में पासवर्ड सेव करने की जगह एक समर्पित पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें।

6. सिक्योरिटी अपडेट और बैकअप

जब भी फ़ोन में अपडेट का नोटिफिकेशन आता है, हममें से ज़्यादातर लोग उसे ‘बाद में’ कहकर टाल देते हैं। यह आदत आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। ये अपडेट सिर्फ नए फीचर या रंग-रूप बदलने के लिए नहीं होते, बल्कि इनमें सुरक्षा से जुड़े छेद बंद करने के पैच भी होते हैं। ठग और हैकर पुराने सॉफ्टवेयर की जानी-पहचानी कमज़ोरियों का ही फायदा उठाते हैं।

Android फ़ोन में सेटिंग्स में जाकर ‘System’ या ‘About phone’ के नीचे ‘System update’ देखें कि कोई अपडेट लंबित तो नहीं है। इसके अलावा, अपने सभी ऐप्स को भी अपडेट रखें। Play Store में जाकर सभी ऐप्स को अपडेट करने की आदत डालें। खासकर बैंकिंग, UPI और सोशल मीडिया ऐप्स के अपडेट सबसे पहले करें। कई बार किसी ऐप में कोई बग होता है जिससे आपका डेटा लीक हो सकता है, और कंपनी उसे ठीक करने के लिए अपडेट जारी करती है।

अगर आपका फ़ोन पुराना हो चुका है और उसे अब अपडेट मिलने बंद हो गए हैं, तो सतर्क हो जाइए। बिना सुरक्षा अपडेट वाला फ़ोन एक खुला दरवाजा है। ऐसे में कोशिश करें कि उस फ़ोन पर बैंकिंग या संवेदनशील काम न करें। नया फ़ोन लेना महँगा लग सकता है, लेकिन अकाउंट खाली होने से बेहतर है।

  • रात में सोने से पहले फ़ोन को चार्जिंग पर लगाएँ और ऑटो अपडेट ऑन कर दें।
  • सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम ही नहीं, Google Play System Update को भी चेक करें।
  • किसी अनजान ऐप को ‘Accessibility’ की अनुमति कभी न दें। ठगी वाले ऐप इसी के सहारे स्क्रीन पढ़ते और बटन दबाते हैं।

बैकअप और मुसीबत के लिए तैयारी

सुरक्षा का मतलब सिर्फ चोरी से बचना नहीं है, बल्कि मुसीबत आने पर संभलने की तैयारी भी है। मान लीजिए आपका फ़ोन हैक हो ही गया और उसमें मौजूद हर चीज़ लॉक हो गई। अगर आपके पास बैकअप है, तो आप बिना घबराए फ़ोन को फॉर्मेट कर सकते हैं। Google Drive और Google Photos में ऑटोमैटिक बैकअप चालू कर दीजिए। इससे आपके कॉन्टैक्ट्स, कैलेंडर और तस्वीरें सुरक्षित रहती हैं।

WhatsApp का बैकअप भी समय-समय पर होते रहना चाहिए। अगर आपका अकाउंट किसी और डिवाइस पर चला जाता है, तो आपके पास पुरानी चैट्स का बैकअप न होने पर आपकी बातचीत और ज़रूरी दस्तावेज़ हमेशा के लिए चले जाते हैं। इसके अलावा, अपने ज़रूरी दस्तावेजों की एक कॉपी किसी सुरक्षित जगह पर रखें, ताकि फ़ोन जाने पर भी आपके पास सबूत रहें।

अगर आपको लगे कि आपका फ़ोन हैक हो गया है, तो सबसे पहले उसे इंटरनेट से काट दें। फ्लाइट मोड ऑन कर दें। फिर किसी दूसरे डिवाइस से अपने सभी मुख्य अकाउंट्स के पासवर्ड बदलें और बैंक को सूचना दें। पैसों की ठगी हुई हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। इसके बाद ही फ़ोन को फॉर्मेट करें। बिना पासवर्ड बदले फॉर्मेट करने से कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि हैकर के पास आपके अकाउंट की चाबी पहले से मौजूद है।

  • Google Photos में ‘Backup’ चालू रखें।
  • हर खाते का पासवर्ड अलग और लंबा रखें। पासवर्ड तब बदलें जब उसके लीक होने का शक हो।
  • पुराने फ़ोन को बेचने से पहले फैक्ट्री रीसेट ज़रूर करें और सिम व मेमोरी कार्ड निकालना न भूलें।

7. सिम कार्ड और नेटवर्क की सुरक्षा

हम फ़ोन की तो बात करते हैं, लेकिन असली चाबी तो आपका सिम कार्ड है। आपके सारे OTP, बैंकिंग मैसेज और कॉल उसी सिम पर आते हैं। अगर कोई आपके नाम पर नया सिम कार्ड निकलवा लेता है, तो आपका फ़ोन बेकार हो जाता है। इसे SIM Swap Fraud कहते हैं। इसमें हैकर आपके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी जुटाकर टेलीकॉम कंपनी को बेवकूफ बनाता है और आपका नंबर अपने सिम पर ट्रांसफर करवा लेता है।

SIM Swap में गड़बड़ी टेलीकॉम कंपनी के स्तर पर होती है, इसलिए इसे फ़ोन की सेटिंग से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता। फिर भी दो चीज़ें मदद करती हैं। पहली, सेटिंग्स में ‘SIM card lock’ चालू करें, ताकि सिम किसी और फ़ोन में डालने पर पिन माँगे। दूसरी, अगर आपके फ़ोन का नेटवर्क अचानक चला जाए और लंबे समय तक न लौटे, तो इसे हल्के में न लें। उसी समय अपने ऑपरेटर को कॉल करें और बैंक खाते देखें।

कभी भी अपना OTP किसी को फोन पर न बताएं, चाहे सामने वाला खुद को बैंक मैनेजर ही क्यों न बताए। बैंक या कोई भी कंपनी आपसे कभी OTP नहीं पूछती। यह सबसे आम तरीका है जिससे भारत में लोगों को ठगा जाता है। फोन पर आने वाले उन कॉल्स से सावधान रहें जो कहते हैं कि आपका KYC खत्म हो रहा है या आपका अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा। सरकार की संचार साथी वेबसाइट पर आप देख सकते हैं कि आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं, और जो नंबर आपका नहीं है उसकी शिकायत भी कर सकते हैं।

  • अपने नंबर को Aadhaar या बैंक से जोड़ते समय हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें।
  • फोन पर कोई भी Remote Access ऐप जैसे AnyDesk या TeamViewer इंस्टॉल करने को कहें तो साफ मना कर दें।
  • महीने में एक बार अपने बैंक स्टेटमेंट में छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन ज़रूर चेक करें।

आज ही करने वाला क्विक चेकलिस्ट

ऊपर बताई गई बातें पढ़कर शायद आपको लगे कि बहुत काम है, लेकिन असल में इनमें से ज़्यादातर चीज़ें सिर्फ एक बार सेट करनी होती हैं। नीचे एक छोटी सी लिस्ट दी जा रही है। इसे आज शाम को चाय की चुस्की के साथ पूरा कर लीजिए। हर काम के आगे मन ही मन टिक मार्क लगाते जाइए।

  1. फ़ोन की लॉक स्क्रीन पर मजबूत पिन या पासवर्ड लगाएँ और फिंगरप्रिंट चालू करें।
  2. Google अकाउंट और WhatsApp पर Two-Factor Authentication चालू करें।
  3. Permission Manager में जाकर उन ऐप्स की परमिशन हटाएँ जिनकी ज़रूरत नहीं है।
  4. Play Protect का स्कैन चलाएँ और पक्का करें कि वह ऑन है।
  5. सिम कार्ड का लॉक ऑन करें और संचार साथी पर देख लें कि आपके नाम पर कितने नंबर चल रहे हैं।
  6. सिस्टम अपडेट और सभी ऐप्स के अपडेट इंस्टॉल करें।
  7. Google Photos और WhatsApp का बैकअप चालू करें।
  8. अपने बैंकिंग ऐप्स पर अलग से ऐप लॉक लगाएँ।
  9. पुराने और बिना काम के ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दें।
  10. आज से ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करने और किसी को OTP न बताने की कसम खाएँ।

याद रखिए, हैकर आमतौर पर सबसे आसान शिकार की तलाश में रहते हैं। जिस फ़ोन की सुरक्षा कमज़ोर होती है, वही उनका निशाना बनता है। अगर आपने ये सात कदम उठा लिए, तो आपकी दीवार इतनी ऊँची हो जाएगी कि चोर आपके पड़ोसी के खुले दरवाजे की तरफ चला जाएगा। आपका डेटा और आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।